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संत रैदास का साहित्यिक अवदान
कृति कुमारी
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संत’
शब्द संस्कृत भाषा से व्युत्पन्न है, यद्यपि संस्कृत में इसका प्रयोग बहुत कम मिलता है।
आधुनिक इंडो-आर्य भाषाओं में, विशेषकर सगुण और निर्गुण भक्तिकालीन साहित्य में, ’संत’ शब्द का व्यापक रूप से प्रयोग हुआ है। इस प्रकार, ’संत काव्य’ से आशय उन कवियों और चिंतकों की
काव्य-रचनाओं से है जिन्हें आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निर्गुण परंपरा की
’ज्ञानाश्रयी’ शाखा के अंतर्गत रखा है। प्राचीन काल से ही भारत की भूमि संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक साधकों की पवित्र भूमि रही है।
समस्त मानवता के कल्याण के
How to Cite:
[1] कृति कुमारी, “संत रैदास का साहित्यिक अवदान,” International Advanced Research Journal in Science, Engineering and Technology (IARJSET), DOI: 10.17148/IARJSET.2026.13726
